'उसने कहा था'-
'गुनाहों का देवता' हूँ मैं
निभा पाओगी..??
मैंने कहा-
'मैला आँचल' हूँ मैं
अपना पाओगे..??
अब ये मत कहना-
कि तुम..
'पुष्प की अभिलाषा' हो
और मैं 'मधुशाला'
रंगत से 'गोरा' हूँ
पर मन का काला..
मेरी ये जुड़वाँ
'दो बहनें' जो आंखें हैं
बोलो ज़रा इनसे
बच के कहाँ जाओगे
सोचा भी कैसे..
कि मेरे प्रेम का,
'गबन' कर जाओगे
अच्छा सुनो मिलना कभी
'पूस की रात' में
मिलेगा न हमसा कोई
तुम्हे पूरी कायनात में
ख़बरदार जो कहा चाँद हमें
'चाँद का मुंह टेढ़ा है'
मेरे जो क़रीब है वो
'सूरज का सातवां घोड़ा है'
'पिंजर' में कैद है
कब से मन मेरा
तुमको ही टेरा करे
ये 'बन्दी जीवन' मेरा
'गीतांजलि' बन जाऊं
स्पर्श जो तेरा पाऊं
'जूही की कली' सी
निखर-निखर जाऊं
पहना दूं 'मंगलसूत्र'
'परिणीता' बना लूँ तुझे
'आषाढ़ का एक दिन' था
जब ये 'उसने कहा था'
हाँ..ये 'उसने कहा था'।।
-❤️❤️❤️✍️✍️
'गुनाहों का देवता' हूँ मैं
निभा पाओगी..??
मैंने कहा-
'मैला आँचल' हूँ मैं
अपना पाओगे..??
अब ये मत कहना-
कि तुम..
'पुष्प की अभिलाषा' हो
और मैं 'मधुशाला'
रंगत से 'गोरा' हूँ
पर मन का काला..
मेरी ये जुड़वाँ
'दो बहनें' जो आंखें हैं
बोलो ज़रा इनसे
बच के कहाँ जाओगे
सोचा भी कैसे..
कि मेरे प्रेम का,
'गबन' कर जाओगे
अच्छा सुनो मिलना कभी
'पूस की रात' में
मिलेगा न हमसा कोई
तुम्हे पूरी कायनात में
ख़बरदार जो कहा चाँद हमें
'चाँद का मुंह टेढ़ा है'
मेरे जो क़रीब है वो
'सूरज का सातवां घोड़ा है'
'पिंजर' में कैद है
कब से मन मेरा
तुमको ही टेरा करे
ये 'बन्दी जीवन' मेरा
'गीतांजलि' बन जाऊं
स्पर्श जो तेरा पाऊं
'जूही की कली' सी
निखर-निखर जाऊं
पहना दूं 'मंगलसूत्र'
'परिणीता' बना लूँ तुझे
'आषाढ़ का एक दिन' था
जब ये 'उसने कहा था'
हाँ..ये 'उसने कहा था'।।
-❤️❤️❤️✍️✍️

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